अनुकूल गुण परिणाम - एक समीक्षा

Authors

  • स्रिता देवी नेट, शोधच्छात्रा, संस्कृत, शिब्ली नेशनल पी.जी. कालेज, आजमगढ़, यूनिवर्सिटी (पूर्वान्चल), उत्तर प्रदेश, भारत।

Abstract

आसन के अभ्यास के लिए आवश्यक शारीरिक और मानसिक स्थिरता पाने के लिए इस आसन का उपयोग होता है। इसमें मस्तिष्क की पेशियों में बिना बाधा के रक्त की आपूर्ति के कारण उसमें झोंके कम होती हैं, स्पंदन कम होते है, स्थिरता आ जाती है और तटस्थ वृत्ति उत्पन्न होती है। यहीं तटस्थता और निर्बाधता आगे के आसन अभ्यास की ठोस नींव बनती है। इस आसन से पूरा शरीर ताजा रहता है विशेष रूप से रीढ़ की हड्डियाँ और मज्जारज्जु तन जाने से शरीर का आलस्य दूर होकर मस्तिष्क फुर्तीला बनता है। अधोमुख श्वानासन के ये दो प्रकार के दोहरे लाभ ध्यान रखकर प्रातः अभ्यास के आरंभ में यह आसन करने से मन और शरीर तरोताजा बनकर कार्यशील हो जाता है। सायंकाल में आसनाभ्यास के आरंभ करने से शरीर और मन स्थिर होने में सहायता मिलती है।

Keywords:

अनुकूल, गुण, परिणाम, शारीरिक, मानसिक, प्रकृति, आसन, अभ्यास, मन।

References

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Published

2020-09-30

Issue

Section

Research Articles

How to Cite

[1]
स्रिता देवी, " अनुकूल गुण परिणाम - एक समीक्षा" Shodhshauryam International Scientific Refereed Research Journal (SHISRRJ), ISSN : 2581-6306, Volume 3, Issue 5, pp.01-05, September-October-2020.