नैतिकता और मानवीय मूल्य (संस्कृत साहित्य और आधुनिक परिप्रेक्ष्य में)
Abstract
बिखरते हुए मानव-मूल्यों को समय के प्रवाह के साथ सहेजना होगा। इसका दायित्त्व सर्वप्रथम माता-पिता पर समाज के उस प्रबुद्ध वर्ग जिनमें शिक्षक, चिकित्सक, अभियांत्रिक, साहित्यकार और विद्धान पर भी हैं। जिनके द्वारा एक स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण हो सकता है।
Keywords:
संस्कृत, साहित्य, नैतिकता, मानवीय-मूल्य।References
- संस्कृत साहित्य का इतिहास - डाॅ0 चन्द्रशेखर पाण्डेय
- संस्कृत साहित्य का इतिहास - डाॅ0 जयकिशन प्रसाद खण्डेलवाल
- रामायण -वाल्मिकि
- महाभारत -वेदव्यास
- श्रीमद्भगवद्गीता - गीता प्रेस
- नीति शतकम् -भर्तृहरि
- रघुवंशम् - कालिदास
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